निकलूंगी बनकर नया सवेरा है स्वयं से एक वचन मेरा। निकलूंगी बनकर नया सवेरा है स्वयं से एक वचन मेरा।
वो हैं कि चांदनी मुस्कान मुस्कुराते रहे वो हैं कि चांदनी मुस्कान मुस्कुराते रहे
जरा सा दुःख चला आया,गरल सम मद्य ले आए। खुशी कोई बिना इसके,जताई क्यों नहीं जाए। किसी की आस हो व... जरा सा दुःख चला आया,गरल सम मद्य ले आए। खुशी कोई बिना इसके,जताई क्यों नहीं जाए...
कहती अनु ये बात, गरल वो कब तक पीती। जीवन की अब साँझ, भुलाई बातें बीती कहती अनु ये बात, गरल वो कब तक पीती। जीवन की अब साँझ, भुलाई बातें बीती
अगर अभी भी न समझे तो मनुष्य का अस्तित्व रह जाएगा हिलकर। अगर अभी भी न समझे तो मनुष्य का अस्तित्व रह जाएगा हिलकर।
सबकी तृष्णा समाप्त करता, आखिर समंदर में मिल जाता है सबकी तृष्णा समाप्त करता, आखिर समंदर में मिल जाता है